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Friday, July 9, 2021

Guru Dutt Birthday: क्‍या गुरु दत्त ने आत्‍महत्‍या की थी? जानिए, क्‍या हुआ था उस मनहूस दिन से ठीक पहले

भारतीय सिनेमा के दिग्‍गज फिल्‍ममेकर-ऐक्‍टर-प्रड्यूसर-राइटर गुरु दत्त हमारे बीच नहीं हैं। 9 जुलाई 1925 को ब्रिटिश राज में पादुकोण (कर्नाटक) में पैदा हुए गुरु दत्त साहब (Guru Dutt Birthday) ने बॉलिवुड को 'प्‍यासा' से लेकर 'कागज के फूल', 'चौदहवीं का चांद' और 'साहि‍ब बीवी और गुलाम' जैसी बेहतरीन फिल्‍में दीं। 50 और 60 के दशक के तमाम फिल्‍मकारों में उन्‍हें सर्वश्रेष्‍ठ माना जाता है। लेकिन यह दुर्भाग्‍य ही है कि इस दिग्‍गज कलाकार की 10 अक्‍टूबर 1964 को महज 39 साल की उम्र में मौत हो गई। मुंबई के पेड्डर रोड स्‍थ‍ित किराये के घर में गुरु दत्त की लाश मिली थी। बताया गया कि उनकी मौत बहुत अध‍िक शराब पीने और नींद की गोलियों के कारण हुई। लेकिन मौत को लेकर शंकाएं (Guru Dutt Death Mystery) तब भी जाहिर की गई थीं और आज भी उनकी मौत इंडस्‍ट्री के लिए एक सवाल ही है।

भारतीय सिनेमा के दिग्‍गज फिल्‍ममेकर-ऐक्‍टर गुरु दत्त हमारे बीच नहीं हैं। 9 जुलाई 1925 को उनका जन्‍म (Guru Dutt Birthday) हुआ था। इस दिग्‍गज कलाकार की 10 अक्‍टूबर 1964 को महज 39 साल की उम्र में मौत हो गई। मुंबई के पेड्डर रोड स्‍थ‍ित किराये के घर में गुरु दत्त की लाश मिली थी। मौत को लेकर आशंकाएं (Guru Dutt Death Mystery) तब भी जाहिर की गई थीं कि कि उनकी मौत एक आत्‍महत्‍या है या ड्रग ओवरडोज।


Guru Dutt Birthday: क्‍या गुरु दत्त ने आत्‍महत्‍या की थी? जानिए, क्‍या हुआ था उस मनहूस दिन से ठीक पहले

भारतीय सिनेमा के दिग्‍गज फिल्‍ममेकर-ऐक्‍टर-प्रड्यूसर-राइटर गुरु दत्त हमारे बीच नहीं हैं। 9 जुलाई 1925 को ब्रिटिश राज में पादुकोण (कर्नाटक) में पैदा हुए गुरु दत्त साहब (Guru Dutt Birthday) ने बॉलिवुड को 'प्‍यासा' से लेकर 'कागज के फूल', 'चौदहवीं का चांद' और 'साहि‍ब बीवी और गुलाम' जैसी बेहतरीन फिल्‍में दीं। 50 और 60 के दशक के तमाम फिल्‍मकारों में उन्‍हें सर्वश्रेष्‍ठ माना जाता है। लेकिन यह दुर्भाग्‍य ही है कि इस दिग्‍गज कलाकार की 10 अक्‍टूबर 1964 को महज 39 साल की उम्र में मौत हो गई। मुंबई के पेड्डर रोड स्‍थ‍ित किराये के घर में गुरु दत्त की लाश मिली थी। बताया गया कि उनकी मौत बहुत अध‍िक शराब पीने और नींद की गोलियों के कारण हुई। लेकिन मौत को लेकर शंकाएं (Guru Dutt Death Mystery) तब भी जाहिर की गई थीं और आज भी उनकी मौत इंडस्‍ट्री के लिए एक सवाल ही है।



आत्‍महत्‍या या ड्रग ओवडोज, कैसे गई जान?
आत्‍महत्‍या या ड्रग ओवडोज, कैसे गई जान?

गुरु दत्त साहब का असली नाम वसंत कुमार श‍िवशंकर पादुकोण था। प्‍यार से लोग उन्‍हें गुरु दत्त पुकारते थे। जब 1964 के 10 अक्‍टूबर को उनकी लाश मिली, तो हर कोई चौंक गया। ऐसी चर्चाएं शुरू हो गईं कि गुरु दत्त ने आत्‍महत्‍या (Suicide) की है। कुछ ने इसे ओवरडोज (Drug Overdose) के कारण मौत माना। गुरु दत्त को लेकर आत्‍महत्‍या की चर्चा इसलिए भी हुई, क्‍योंकि वह इससे पहले 2 बार ऐसी कोश‍िश कर चुके थे! हालांकि, उनके बेटे अरुण ने यही माना कि उनके पिता की मौत दुर्घटनावश शराब और नींद की गोलियों के मिश्रण से हुई है।



'यह शराब और नींद की गोलियों के कारण हुआ'
'यह शराब और नींद की गोलियों के कारण हुआ'

अरुण ने तब कहा था, 'मेरे पिता को नींद नहीं आने की बीमारी थी। लेकिन उन्होंने किसी दूसरे इंसान की तरह ही इसके लिए नींद की गोलियां खाते थे। उस दिन वह नशे में थे और उसने अधिक मात्रा में गोलियां ले ली थीं, जिससे उसकी मौत हो गई। अध‍िक शराब और नींद की गोलियों का यह मिश्रण घातक था।'



भाई ने कहा- उन्‍होंने आत्‍महत्‍या नहीं की
भाई ने कहा- उन्‍होंने आत्‍महत्‍या नहीं की

दूसरी ओर, गुरु दत्त के छोटे भाई और फिल्‍ममेकर देवी दत्त (Devi Dutt) ने भी हमेशा से इन संभावनाओं को खारिज किया कि उन्‍होंने आत्‍महत्‍या की है। देवी दत्त ने कई बार यह कहा कि उनके भाई को 'नींद नहीं आने की बीमारी' थी, इस कारण वह नींद की दवाइयां लेते थे। इसलिए निश्‍चि‍त तौर पर यह दुर्घटनावश शराब और दवाइयों के ओवरडोज से ही हुआ है।



9 अक्‍टूबर, मौत से पहले वो आख‍िरी दिन
9 अक्‍टूबर, मौत से पहले वो आख‍िरी दिन

गुरु दत्त अपनी निजी जिंदगी में परेशानियों से गुजर रहे थे। उनकी वैवाहिक जिंदगी में प्‍यार कम और कलेश ज्‍यादा बढ़ गए थे। 'फिल्‍मफेयर' मैगजीन को दिए इंटरव्‍यू में देवी दत्त ने कहा, 'साहिब बीबी और गुलाम फिल्‍म के बाद गुरु दत्त और भाभी (गीता दत्त) ने समझौता कर लिया था। यह निर्णय लिया गया कि 48, पाली हिल के रीडवलपमेंट के बाद पूरा परिवार एकसाथ रहेगा। 9 अक्टूबर 1964 को वह तनुजा, रहमान और डायरेक्‍टर सईद लतीफ के साथ अपने प्रोडक्शन में बन रही फिल्‍म 'बहारें फिर भी आएंगी' के लिए अपने स्टूडियो में थे। लेकिन मला सिन्हा जी उस दिन मद्रास (चेन्‍नई) में फंस गई थीं। इसलिए शूटिंग टाल दी गई।'



शाम को घर आने वाले थे बच्‍चे
शाम को घर आने वाले थे बच्‍चे

देवी दत्त आगे कहते हैं, 'भाभी बच्‍चों के स्‍कूल गई थीं। पैरेंट्स-टीचर मीटिंग थी। शाम तक दोनों बेटे तरुण और अरुण को भाई के पास आना था। हम कार में घर के लिए निकले। गुरु दत्त ने मुझे बांद्रा से पतंग और मांझा खरीदने के लिए कहा था, वह वीकेंड में बच्चों के साथ पतंग उड़ाना चाहते थे। फिर हम कोलाबा में रुके। उसने बेटों के लिए कपड़े खरीदे और कुछ मेरे लिए भी। इसके बाद हम कांजी भाई ब्रोकर के घर शराब की बोतल लेने गए। गुरु दत्त ने उनसे कहा कि वह इन्‍वेस्‍टर्स से पैसे वापस ले, क्‍योंकि वह 'कनीज' के कलर प्रिंट्स इम्‍पोर्ट करना चाहते हैं। जब हम यह सब कर के घर लौटे तो वह किचन में ऑमलेट बनाने चले गए।'



...और दोनों के बीच कहासुनी हो गई
...और दोनों के बीच कहासुनी हो गई

गुरु दत्त के साथ अपने उस आख‍िरी दिन को याद करते हुए देवी कहते हैं, 'उसने किचन से ही आवाज लगाकर मुझे कहा कि जब पूरा परिवार साथ रहने लगेगा तो वह उनके लिए भी खाना पकाएंगे। उसने कहा कि हम 9वीं और 10वीं मंजिल भी ले लेंगे। ताकि हम वहां से हर शाम सूर्यास्‍त देख सकें। इसी बीच हमारे चार्टर्ड अकाउंटेंट गोले साहब वहां आ गए। उन्‍होंने बताया कि इनकम टैक्‍स डिपार्टमेंट से फाइनल नोटिस आया है। हमें दो साल से बकाया टैक्‍स चुकाने होंगे। इस बात को लेकर दोनों में बहस हो गई। गोले साहब ने चेतावनी दी कि ऐसा ही रहा तो किसी दिन इनकम टैक्‍स वाले स्‍टूडियो, घर और ऑफिस‍ पर छापेमारी भी कर सकते हैं। गुरु दत्त ने तभी मुझसे कहा कि तुम घर चले जाओ।'



भाभी ने मेसेज भ‍िजवाया- बच्‍चे नहीं आ रहे हैं
भाभी ने मेसेज भ‍िजवाया- बच्‍चे नहीं आ रहे हैं

देवी अपनी बातचीत में आगे बताते हैं, 'वहां से निकलने के बाद घर के नीचे ही मुझे अबरार अल्‍वी मिले। उसने मुझसे कहा कि भाभी ने यह मेसेज दिया है कि वह बच्‍चों को नहीं भेज पाएंगी, क्‍योंकि बहुत देर हो गई है। नहीं पता था कि गुरु दत्त के साथ मेरी वह आख‍िरी शाम होगी। अगले दिन मुझे खबर मिली कि वह इस दुनिया में नहीं है। मैं आज भी यही कहूंगा कि उसने आत्‍महत्‍या नहीं की। यह निश्‍च‍ित तौर पर अबरार के साथ अध‍िक शराब पीने और नींद की गोलियों के कारण हुआ है।'





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