Hindi English News, Entertainment, Shopping, shopping offers, Shopping deals,lifestyle, bollywood, movies, state news, offers, Amazon,amazon offers,Latest news, showbiz, sport, comment, lifestyle, city, video and pictures from the Daily Express and Sunday Express newspapers and Express

Subscribe Us

test

Breaking

Post Top Ad

Your Ad Spot

Sunday, October 4, 2020

सर्वे में ट्रम्प अपने गढ़ में ही बाइडेन से पिछड़े, इन राज्यों में प्रतिद्वंद्वी से 10 गुना ज्यादा पैसा खर्च कर रहे

नए सर्वे ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की रिपब्लिकन पार्टी की मुसीबतें बढ़ा दी है। क्योंकि रिपब्लिकन पार्टी के गढ़ माने जाने वाले टेक्सास, आइयोवा, जॉर्जिया जैसे राज्यों में भी जो बाइडेन ने ट्रम्प के मुकाबले सात अंक तक की बढ़त बना ली है। इसी वजह से ट्रम्प की पार्टी का अपने ही गढ़ में खर्चा कई गुना बढ़ गया है।

टेक्सास में पार्टी 1976 और जार्जिया में 1992 से कभी नहीं हारी है। नेशनल स्तर पर भी ज्यादातर पोल में बाइडेन बढ़त बनाए हुए हैं। विस्कोंसिन, पेनिसिल्विया, मिशिगन, नेवादा और ओहियो जैसे स्विंग स्टेट्स जहां हार-जीत तय होती है, वहां भी बाइडेन आगे चल रहे हैं।

2016 में ट्रम्प ने टेक्सास में 9.2 अंक से जीता था

2016 में ट्रम्प ने टेक्सास में 9.2 अंक से लड़ाई जीती थी और 38 इलेक्टोरल वोट हासिल किए थे। यह ट्रम्प को किसी राज्य से मिली दूसरी सबसे बड़ी जीत थी। इसी तरह जॉर्जिया में 5.7% अंक की बढ़त हासिल कर सभी 16 इलेक्टोरल मत हासिल किए थे। टेक्सास में ट्रम्प की पार्टी ने अकेले अगस्त में ही 13 लाख डॉलर खर्च किए हैं।

टेक्सॉस में डेमोक्रेटिक पार्टी की एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर मैनी गर्शिया बताती हैं कि क्षेत्र में रिपब्लिकन पार्टी का सक्रिय होना सामान्य बात नहीं है। क्योंकि यहां रिपब्लिकन अपनी जीत को लेकर हमेशा आश्वस्त रहते हैं। इससे पहले पार्टी ने कभी भी इतनी बड़ी रकम चुनाव प्रचार में खर्च नहीं की। वहीं इस राज्य में डेमोक्रेटिक पार्टी ने 1.5 लाख डॉलर ही खर्चे।

इस पर रिपब्लिकन पार्टी के हेड रोना मेक्डेनियल का कहना है कि हम किसी भी राज्य को हल्के में नहीं लेना चाहते। इसी तरह जार्जिया में ट्रम्प की पार्टी सितंबर अंत तक 12.8 मिलियन डॉलर खर्च कर चुकी हैं। वहीं बाइडेन ने करीब 50 हजार डॉलर खर्च किए हैं।

ट्रम्प की मेडिकल रिपोर्ट

एंटीबॉडी दवा देकर ट्रम्प पर क्लीनिकल ट्रायल हो रहा

  • ट्रम्प की उम्र, 110 किलो वजन और बढ़ा कोलेस्ट्रोल चिंता का विषय है
  • ट्रम्प जैसी बीमारियों वाले संक्रमितों में 65% भर्ती हुए और 32% की जान गई

74 साल के ट्रम्प को हल्का बुखार है। बल्गम बढ़ने से नाक बंद है। उनका 110 किलो वजन, बढ़े कोलेस्ट्रोल के चलते कोरोना उनकी समस्या बढ़ा सकता है। वे बढ़े कोलेस्ट्रोल की वजह से स्टैटिन और दिल के दौरे से बचने के लिए ऐस्प्रिन लेते रहे हैं।

ट्रम्प के डॉ. शॉन पी कॉन्ली ने बताया कि एंटीबॉडी दवा देकर उन पर क्लीनिकल ट्रायल किया गया, जिसके रिजल्ट सही रहे हैं। उन्हें विटामिन डी, जिंक, मेलाटोनिन, फेमोटिडाइन व ऐस्प्रिन दी जा रही है। सेंटर फॉर डिजीज कन्ट्रोल ऐंड प्रिवेंशन के आंकड़े बताते हैं कि ट्रम्प की उम्र वर्ग और उनके जैसी बीमारियों वाले संक्रमितों में 65% भर्ती हुए हैं और 32% को जान गंवानी पड़ी।

2016 में सर्वे गलत रहे थे, इस बार स्विंग स्टेट में ज्यादा सर्वे हो रहे हैं

राष्ट्रपति चुनाव की असल लड़ाई स्विंग स्टेट्स में होती है। सर्वे में ऐसे 8 राज्यों में ट्रम्प पीछे हैं। यहां से 125 इलेक्टोरल वोट आते हैं। 2016 के सर्वे में हिलेरी को बढ़त दिखाई थी लेकिन लोगों ने वोट ट्रम्प को दिया। इस गलती से बचने के लिए एजेंसियां इस बार ज्यादा पोल करा रही हैं।

50 में 48 राज्य में जिस पार्टी को बहुमत मिलता है, उसके खाते में विरोधी के भी वोट जुड़ जाते हैं

अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में जीत हमेशा उस उम्मीदवार की नहीं होती है जिसे सबसे ज्यादा वोट मिलते हैं। हर राज्य में आबादी के लिहाज से निश्चित इलेक्टोरल कॉलेज वोट तय किए गए हैं। 50 राज्य 538 इलेक्टोरल चुने जाते हैंं। राष्ट्रपति बनने के लिए 270 या उससे ज्यादा इलेक्टोरल वोट चाहिए होते हैं। जो भी पार्टी जिस राज्य में ज्यादा वोट पाती है, उसे राज्य के सभी इलेक्टोरल वोट उसे मिले जाते हैं। पढ़िए इस पर नॉलेज रिपोर्ट...

क्या पॉपुलर वोट ज्यादा पाने के बाद भी प्रत्याशी हार सकता है?

हां, यह संभव है। प्रत्याशी को राष्ट्रीय स्तर पर अपने प्रतिद्वंद्वी उम्मीदवार से ज्यादा वोट मिले, लेकिन हो सकता है वो पर्याप्त 270 इलेक्टोरल वोट हासिल न कर सके।

19वीं सदी से अब तक ट्रम्प समेत 5 राष्ट्रपति कम वोट पाकर बनें राष्ट्रपति

19वीं सदी से अब तक एेसा 5 बार हुआ है। बीते पांच चुनावों में दो बार। 2016 में राष्ट्रीय स्तर पर हिलेरी क्लिंटन को ट्रम्प से करीब 30 लाख ज्यादा वोट मिले थे। पर वे पर्याप्त इलेक्टोरल वोट नहीं जुटा सकीं। 2000 में जार्ज डब्ल्यू बुश के प्रतिद्वंद्वी अल गोर को 5 लाख ज्यादा वोट मिले थे।

यह सिस्टम क्यों चुना गया ?

1787 में अमेरिकी संविधान पारित हुआ था, तब कहा गया था राष्ट्रीय पॉपुलर वोट के आधार पर राष्ट्रपति चुनना अनुचित है। क्योंकि देश बड़ा था और लोगों तक पहुंचना मुश्किल था। इसी समय लोग सांसदों द्वारा राष्ट्रपति चुनने के पक्ष में भी नहीं थे। इसलिए यह इलेक्टोरल कॉलेज की व्यवस्था बनाई गई।

चुने गए इलेक्टोरेट अपनी पार्टी को वोट देने के लिए बाध्य नहीं हैं?

पार्टी को जिस राज्य में बहुमत मिलता है, उसे उस राज्य के सभी इलेक्टोरल वोट मिल जाते हैं। मान लीजिए, टेक्सास में कुल 38 इलेक्टोरल चुने जाते हैं। अगर रिपब्लिकन के 20 इलेक्टोरेट चुने जाते हैं, तो रिपब्लिकन के खाते में पूरे 38 गिने जाएंगे। हालांकि संवैधानिक तौर पर चुने गए इलेक्टोरेट जीती हुई पार्टी के उम्मीदवार को चुनने के लिए बाध्य नहीं हैं। लेकिन वे शिष्टाचार के नाते वे एेसे उदाहरण कम दिखते हैं।



Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today
रिपब्लिकन पार्टी के गढ़ माने जाने वाले टेक्सास, आइयोवा, जॉर्जिया जैसे राज्यों में भी जो बाइडेन ने ट्रम्प के मुकाबले सात अंक तक की बढ़त बना ली है।


from Dainik Bhaskar https://ift.tt/2HVOtl1

No comments:

Post a Comment

Post Top Ad

Your Ad Spot