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Saturday, July 10, 2021

ओटीटी ने हम ऐक्टर्स को नया विकल्प दिया है: जिमी शेरगिल

बॉलिवुड के उम्दा ऐक्टर्स में से एक का नाम किसी पहचान का मोहताज नहीं है। वह इन दिनों अपनी नई फिल्म कॉलर बम को लेकर चर्चा में हैं, जो ओटीटी पर रिलीज हुई है। इसी सिलसिले में हमने उनसे की ये खास बातचीत: कॉलर बम में क्या खास था कि इस कोरोना के दौर में भी आप इसे करने को राजी हुए? ये कहानी मेरे पास कोविड से पहले आई थी। तब ये वायरस नहीं आया था। उसके कुछ महीने बाद मार्च में लॉकडाउन हो गया। फिर लॉकडाउन में दूसरी बार ये मेरे पास आई। जब पहली बार मैंने कहानी सुनी थी, तो मैंने कुछ सुझाव दिए थे। फिर, दूसरी बार जब वे मेरे पास उन सारे बदलावों को करके आए, तो मुझे कहानी बहुत पसंद आई। किरदार अच्छा था, यंग लोगों की टीम थी, जिन्होंने बहुत मेहनत की थी कहानी और किरदार पर, तो जब लॉकडाउन खुला, हमने दो महीने पहाड़ों में जाकर इसे शूट किया। पिछले एक साल में शूटिंग को लेकर काफी चीजें बदल गई हैं। कोविड के चलते आप लोगों को अचानक फिल्म की लोकेशन भी बदलनी पड़ी थी। ये सारी चीजें कितनी चैलेंजिंग रहीं? शूटिंग वैसे ही बहुत चैलेंजिंग होती है। कोविड न भी हो, तो भी कई बार ऐसा होता है कि आप कहीं पर शूटिंग के लिए जाते हैं, सारी तैयारी होती है, दो महीने आपको वहां शूट करना होता है, लेकिन एक महीने के बाद कुछ दिक्कत आ जाती है या वहां के लोकल लोग दिक्कत खड़ी कर देते हैं, जिससे आपको वापस आना पड़ता है और कहीं और जाकर शूट करना पड़ता है। मेरे साथ ऐसा बहुत बार हुआ है, मगर इस बार तो और भी बड़ा मामला था। हालांकि, जगहें खुल चुकी थी, पर प्रोटोकॉल बहुत सारे फॉलो करने थे। जो काम आप 40 दिन में खत्म कर सकते थे, उसमें आज 70 दिन लग जाते हैं, क्योंकि शूटिंग के घंटे सीमित हो गए हैं। फिल्म में हमने हिमाचल प्रदेश दिखाया है और वहीं शूट किया गया है। बस एक स्कूल ऐसा था, जिसे हमने देखकर रखा था, पर प्रोटोकॉल की वजह से परमिशन नहीं मिली, तो हमें उसकी शूटिंग नैनीताल में करनी पड़ी, क्योंकि वह स्कूल बहुत ग्रैंड दिखना जरूरी था। इस महामारी में ट्रैवल करना, 100-150 लोगों के साथ काम करने में खतरा महसूस नहीं होता? काम पर जाते वक्त क्या सोच रहती है? खतरा तो बिलकुल रहता है, लेकिन हम सबको काम तो करना ही है न। अगर हम काम नहीं करेंगे, तो हमसे लेकर हमारी पूरी टीम के लोग रोजी रोटी कैसे कमाएंगे? ये बात मेरे हिसाब से कहीं न कहीं हर फील्ड पर लागू होती है, लेकिन हां, आपको जो प्रोटोकॉल दिए गए हैं, उसे फॉलो करना पड़ता है। इस वजह से हम एक बबल बनाकर रहते हैं। पूरी टीम साथ में सेट पर जाती है और आती है। ये सारे प्रोटोकॉल निभाना जरूरी है। आपकी वेब सीरीज योर ऑनर 2 की शूटिंग के दौरान आप लोगों पर प्रोटोकॉल को न मानने की पुलिस शिकायत हुई। इस बारे में क्या कहेंगे? मेरा एक कॉन्ट्रैक्ट है इन लोगों के साथ कि मैं इस फिल्म के अलावा अपनी कोई और पर्सनल बात या किसी और प्रॉजेक्ट के बारे में अभी बात नहीं कर सकता हूं, तो उस बारे में मैं कुछ नहीं कहूंगा। लेकिन इन परिस्थितियों का बतौर ऐक्टर आप लोगों की परफॉमेंस पर भी असर पड़ता है? जी हां, बिलकुल पड़ता है। हम भी इंसान हैं। हम पर भी बहुत सारी चीजों का प्रेशर होता है। खास तौर पर जब वह चीज स्क्रीन पर दिखनी होती है। आपके लिए बहुत आसान होता है, स्क्रीन पर देखकर बोल देना कि अरे, ये ठीक से काम नहीं कर रहा है, पर आखिर में तो हम भी इंसान ही हैं। हमें भी प्रेशर में काम करना पड़ता है। उम्र के साथ या काम करते करते हम शायद प्रेशर हैंडल करना सीख जाते हैं, लेकिन इतना आसान नहीं होता है। खासकर यंग ऐक्टर्स, जिन्होंने अभी शुरू किया है, उनके लिए तो बहुत मुश्किल होता है। ये फिल्म थिएटर के बजाय ओटीटी पर रिलीज हुई, इस बात की कोई कसक है या आप संतुष्ट हैं? ओटीटी एक ऐसा प्लैटफॉर्म है, जिसने हमें लॉकडाउन में बहुत एंटरटेन किया है। जब तक थिएटर नहीं खुल जाते हैं, जब तक चीजें नॉर्मल नहीं हो जाती, तब तक ये हम लोगों के लिए बहुत अच्छा प्लैटफॉर्म है। साथ ही हम ऐक्टर्स के लिए एक और विकल्प है कि हमें जो काम थिएटर वाली फिल्मों के लिए मिल रहा है, अगर वह उतना मजेदार नहीं है और हमारे पास ओटीटी की कोई और फिल्म है, जो ज्यादा मजेदार है, तो हम वो चुन सकते हैं। फौज में जाने का सपना टूट गया ऐक्टर न होते, तो क्या होते? इस सवाल पर जिमी कहते हैं, 'बड़ा मुश्किल है कहना, क्योंकि जब ये सोचा था कि ऐक्टर बनना है, तब कोई दूसरा ऑप्शन सोचा नहीं था। उससे पहले बहुत सारे ऑप्शन थे, सोचते थे कि डॉक्टर बनेंगे। फिर कोई क्रिकेट मैच देख लेते थे, तो सोचते थे कि क्रिकेट ही खेलूंगा। जब स्कूल में थे, तो आर्मी या एअरफोर्स में जाने की सोचता था, पर वो सपना वहीं टूट गया, क्योंकि 75-80 पर्सेंट होते हुए भी मैं क्वॉलीफाई नहीं कर पाया, क्योंकि उस जमाने में 98 पर्सेंट लोग फौज में जाना चाहते थे।'


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