सीहोर. नर्मदा नदी से रेत उत्खनन कर उसका परिवहन करने वाले माफियाओं का नेटवर्क कितना जबरदस्त है इसका ताजा उदाहरण गुरुवार को देखने मिला। प्रशासनिक अमला कार्रवाई करने नर्मदा नदी के तट पर पहुंचता, उससे पहले ही रेत के ट्रैक्टर-ट्रॉली गायब हो गए। यह तक ही नहीं प्रशासनिक अमले ने दो घंटे इंतजार किया, लेकिन एक भी ट्रैक्टर-ट्रॉली हाथ नहीं आए। राजस्व अमले को खाली लौटना पड़ा है।
नर्मदा घाटों से अवैध रेत उत्खनन व परिवहन की सूचना पर नायब तहसीलदार रमा कालवा, अजय झा अमले के साथ सीलकंठ, मड़ी, अतरालिया घाट पर पहुंचे। रेत माफियाओं को इसका पता नहीं चले, इसके लिए प्रशासनिक अमला शासकीय वाहन के बजाय एक प्राइवेट गाड़ी से दबिश देने गया। रेत माफियाओं का सूचना तंत्र कितना तगड़ा निकला कि अमले के निकलने से पहले ही रेत माफिया तक सूचना पहुंच गई और सीलकंठ, मड़ी, अतरालिया घाट से सभी ट्रैक्टर-ट्रॉली गायब हो गए। अमला पहुंचा को नर्मदा घाट खाली थे और कुछ नाव बीच धार में रूकीं थी। अमले को नाव से रेत परिवहन करते कुछ नाविक ही दिखे, लेकिन वह हरदा जिले की सीमा में ही नाव रोककर खड़े हो गए। पहले तो राजस्व अमले ने इंतार किया, लेकिन काफी देर तक कोई नहीं आया तो खाली हाथ लौट आए। मालूम हो, रेत माफि या नाव के जरिए दूसरे जिले की सीमा से रेत निकालकर सीहोर जिले की सीमा में लागे हैं। यहां से ट्रैक्टर-ट्रॉली में भरकर उसे बाहर किसी सुरक्षित जगह डंप किया जाता है और फिर डंपर में भरकर सप्लाई करते हैं। कुछ सीधे ट्रैक्टर-ट्रॉली से बेचते हैं। नसरुल्लागंज में आंबा, बडग़ांव, छिंदगांव काछी, डिमावर, मंडी, सातदेव घाट पर रेत का यह अवैध खेल खुलेआम चलता है।
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